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ब्राह्मणों के त्याग और समर्पण

 ब्राह्मण दान देने पे आया तो -दधीचि, दान लेने पे आया तो सुदामा परीक्षा लेने पे आया तो -भृगु, तपोबल पे आया तो कपिल मुनि अहंकार को दबाने पे आया तो अगस्त मुनि धर्म को बचाने पे आया तो आदि शंकराचार्य नीति पे आया तो ... -चाणकय, नेतृत्व करने पे आया तो -अटल बिहारी, बग़ावत पे आया तो -मंगल पांडे, क्रांति पे आया तो -चंद्रशेखर आज़ाद, संगठित करने पे आया तो -केशव बलिराम हेगड़ेवार, संघर्ष करने पे आया तो -विनायक राव सावरकर- निराश हुआ तो -नाथु राम गोडसे और क्रोध मे आया तो -परशुराम

लोग जा रहे है वक्त से पीछे...

90 % लोगों का दिमाग यह सोचता है कि समय कुछ पल के लिए पीछे चला जाए !


और मैं विश्वास के साथ कहता हूं आप भी ऐसा सोचते हो




ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन्सान का दिमाग़ अपनी गलती का पछतावा वक्त बीतने के बाद करता है और
वो उसमे सुधार करने की सोचता है
लेकिन ये संभव नहीं है
इसलिए गलती करने से पहले सोचे की आप इस गलती को बादमें सुधार नहीं सकते 

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