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ब्राह्मणों के त्याग और समर्पण

 ब्राह्मण दान देने पे आया तो -दधीचि, दान लेने पे आया तो सुदामा परीक्षा लेने पे आया तो -भृगु, तपोबल पे आया तो कपिल मुनि अहंकार को दबाने पे आया तो अगस्त मुनि धर्म को बचाने पे आया तो आदि शंकराचार्य नीति पे आया तो ... -चाणकय, नेतृत्व करने पे आया तो -अटल बिहारी, बग़ावत पे आया तो -मंगल पांडे, क्रांति पे आया तो -चंद्रशेखर आज़ाद, संगठित करने पे आया तो -केशव बलिराम हेगड़ेवार, संघर्ष करने पे आया तो -विनायक राव सावरकर- निराश हुआ तो -नाथु राम गोडसे और क्रोध मे आया तो -परशुराम

श्री राम स्तुति (shree ram sturi )

 



श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन

हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख
कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

 

छंद

मन जाहि राच्यो मिलहि सो
वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥




॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम
अङ्ग फरकन लगे।

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