Skip to main content

Featured

ब्राह्मणों के त्याग और समर्पण

 ब्राह्मण दान देने पे आया तो -दधीचि, दान लेने पे आया तो सुदामा परीक्षा लेने पे आया तो -भृगु, तपोबल पे आया तो कपिल मुनि अहंकार को दबाने पे आया तो अगस्त मुनि धर्म को बचाने पे आया तो आदि शंकराचार्य नीति पे आया तो ... -चाणकय, नेतृत्व करने पे आया तो -अटल बिहारी, बग़ावत पे आया तो -मंगल पांडे, क्रांति पे आया तो -चंद्रशेखर आज़ाद, संगठित करने पे आया तो -केशव बलिराम हेगड़ेवार, संघर्ष करने पे आया तो -विनायक राव सावरकर- निराश हुआ तो -नाथु राम गोडसे और क्रोध मे आया तो -परशुराम

आखिर क्यों ? शाहजहां ने मुमताज को मार डाला !

 कहा जाता है की शाहजहां मुमताज के प्यार में कुछ ज्यादा ही पागल था।

 मुमताज के मरने के बाद शाहजहां ने 8 या शादिया की थी लेकिन मुमताज जैसा प्यार नहीं मिला। 

लेकिन आप ये जानकर हेरान हो जाएंगे की मुमताज की मौत का कारण शाहजहां खुद था, क्योंकि मुमताज हर साल एक बच्चे को जन्म वहां थी या 14वें बच्चे के वक्त शाहजहां मुमताज को आगरा से 777 किमी दूर भोगनपुर ले गया जहां सैनिक अभ्यास चल रहा था| जिनसे गर्भवती मुमताज की हलत और मुमताज जब 14वे  बच्चे को जन्म दे रही थी तो ३० घंटे से ज्यादा असहनीय दर्द सहती रही और मुमताज ने एक बेटी को जन्म दिया लेकिन मुम्ताज के शरीर से खून नहीं रुक रहा था और 17जून 1631की  सुबह उसकी मृत्यु हो गयी। 

सबने कहा ये प्यार था या कुछ और लेकिन शाहजहां के डर से कोई कुछ बोल नहीं पाया

 

Comments