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ब्राह्मणों के त्याग और समर्पण

 ब्राह्मण दान देने पे आया तो -दधीचि, दान लेने पे आया तो सुदामा परीक्षा लेने पे आया तो -भृगु, तपोबल पे आया तो कपिल मुनि अहंकार को दबाने पे आया तो अगस्त मुनि धर्म को बचाने पे आया तो आदि शंकराचार्य नीति पे आया तो ... -चाणकय, नेतृत्व करने पे आया तो -अटल बिहारी, बग़ावत पे आया तो -मंगल पांडे, क्रांति पे आया तो -चंद्रशेखर आज़ाद, संगठित करने पे आया तो -केशव बलिराम हेगड़ेवार, संघर्ष करने पे आया तो -विनायक राव सावरकर- निराश हुआ तो -नाथु राम गोडसे और क्रोध मे आया तो -परशुराम

रामसेतु से जुड़े 10 तथ्य

Hello Dosto ,

तो चलिए  आज आप लोग को बतलाते है राम सेतु से जुड़े कुछ रोचक तथ्य





 1.वाल्मीकि रामायण के अनुसार रामसेतु का निर्माण वानर सेना ने उस वक्त किया था जब भगवान राम को रावण की नगरी लंका जाना था।

2.पुराणों के अनुसार रावण की लंका में जाने का कोई और रास्ता नहीं था। ऐसे में हनुमान जी की वानर सेना ने समुद्र में पुल बनाकर इसे बार करने का निर्णय लिया था।
3.मान्यता के अनुसार रामसेतु के निर्माण में 5 दिनों का वक्त लगा था। इसके तहत पहले दिन 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन का कार्य पूरा किया गया था। एक योजन करीब 13 से 15 किलोमीटर लंबा था।
4.धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रामसेतु की लंबाई 100 योजन है। जबकि इसकी चौड़ाई लगभल 10 योजन की है।

5.वाल्मीकि रामायण के अनुसार रामसेतु के निर्माण का कार्य शिल्पकार विश्वकर्मा के पुत्र नल ने किया था। हिंदू पुराणों में नल को रामसेतु का प्रथम शिल्पकार यानि इंजीनियर माना जाता है। वे वानर सेना का मार्ग दर्शन कर रहे थे।


6.रामसेतु भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच उथली चट्टानों की एक चेन है। समुद्र में इन चट्टानों की गहराई 3 फुट से लेकर 30 फुट के बीच है।
7.कहा जाता है कि 15वीं शताब्दी तक रामसेतु पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन 1480 ईस्वी में चक्रवात तूफान के कारण यह टूट गया और जलस्तर बढ़ने के कारण यह पानी में डूब गया था।
8.रामसेतु कितना पुराना है, इसे लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यह पुल करीब 3500 साल पुराना है। वहीं कुछ अन्य के अनुसार इसे 7000 हजार साल पुराना बताया जाता है।
9.रामसेतु के निर्माण के लिए वानर सेना ने पत्थरों, पेड़ों की शाखाओं और पत्तियों का इस्तेमाल किया गया था। इस पुल की खास बात यह है कि समुद्र में ये पत्थर कभी डूबते नहीं थे।
10.वैज्ञानिकों के अनुसार रामसेतु पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल हुआ था वे‘प्यूमाइस स्टोन’ थे। ये पत्थर ज्वालामुखी के लावा से उत्पन्न होते हैं।

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